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पीएनबी के एमडी और सीईओ सीएच एस.एस. मल्लिकार्जुन राव का रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति पर बयान

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न्यूज डेस्क / देहरादून। आरबीआई ने उचित समय पर और अग्रिमसक्रिय कदम के तहत सभी भागीदारों जिसमें व्यक्ति, छोटे कारोबार और एमएसएमई भी शामिल हैं को अप्रत्याशित चुनौतियों से बचाने और विकास को गति दने के लिए जो कदम उठाया है उससे बुनियादी स्तर पर मदद मिलेगी। साथ ही कर्ज देने वाले संस्थान और राज्य सरकारों की मदद के लिए भी कदम उठाए गए हैं जिससे पर्याप्त तरलता और कर्ज का प्रवाह बना रहे।

कोरोना से जुड़े स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र और उससे जुड़े क्षेत्रों के लिए 50 हजार करोड़ रुपये की एकमुश्त सहायता के साथ बैंक जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्र के लिए वर्गीकरण और अतिरिक्त तरलता के लिए जो उपाय किए गए हैं वह आपात चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच आसान बनाएंगे और जीवन एवं आजीविका बचाने में मददगार होंगे जो वर्तमान समय में ज्यादा महत्वपूर्ण है।

इसी तरह विशेष लंबी अवधि की नीतिगत पहल (रेपो ऑपरेशन) के जरिये एसएफबी (एसएलटीआरओ) के लिए 10,000 करोड़ रुपये की राहत कर्ज को जरूरतमंद तक पहुंचाने वाले एमएफआई के लिए बेहद मददगार साबित होगी जो कोरोना की दूसरी लहर से बहुत अधिक प्रभावित हैं। जीएसएपी के तहत 35,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की दूसरे चरण की खरीद से भी अतिरिक्त तरलता उपलब्ध होगी।

व्यक्ति और एमएसएमई के लिए एकमुश्त पुनर्गठन को दोबारा शुरू करने, एमएसएमई के लिए कर्ज प्रवाह बनाए रखने के लिए प्रोत्साहन और कोविड समाधान फ्रेमवर्क 2.0 से अप्रत्याशित स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों को मदद मिलेगी। व्यक्ति, छोटे कारोबार और एमएसएमई को ओटीआर 2.0 से भी बड़ी राहत मिलेगी जिसमें 25 करोड़ रुपये तक का ऋण जोखिम शामिल किया गया है जिन्होंने पिछली बार इसका लाभ नहीं उठाया था। 31 मार्च 2021 तक मानकों को पूरा करने वालों को इसका लाभ मिलेगा।

यह कर्ज देने वाले संस्थानों और उनके कर्जदारों के लिए भी राहतभरा कदम है जो कोरोना संकट की वजह से नकदी की चुनौती से जूझ रहे थे। इसके अलावा व्यक्तिगत और छोटे कारोबार वाले कर्जदारों के लिए भी कर्ज पुनर्गठन में बदलाव किया गया है और उनके कर्ज पुनगर्ठन की अवधि को दो साल के लिए बढ़ा दिया गया है।

इससे उन कर्जदारों को भी राहत मिलगी जिन्होंने पिछली बार मोरेटोरियम का लाभ लिया था और इससे नकदी का प्रवाह भी बढ़ेगा। छोटे कारोबार और एमएसएमई के वर्किंग कैपिटल और मार्जिन आदि का दोबारा आकलन की अनुमति देने से पहले से पुनर्गठन का लाभ ले रहे कर्जदारों को मौजूदा कारोबारी मौहाल में वर्किंग कैपिटल के चक्र को बनाए रखने में मददगार साबित होगा।

इस बेहद कठिन समय में एक बात सबसे राहत देने वाली है कि रिजर्व बैंक कोरोना के बाद भारत की वृद्धि दर को लेकर फिर से आशावान है। साथ ही इसके लिए उसने पूरी प्रतिबद्धता के साथ सभी संसाधनों को युद्द स्तर पर लगा दिया है।

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