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पुलिस महानिदेशक के कड़े निर्देश शिकायती प्रार्थना पत्रों की प्राप्ति न देने व कार्यवाही न होने पर नपेंगे थानाध्यक्ष

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न्यूज डेस्क / देहरादून। अब उत्तराखंड के थाने में प्राप्त होने वाले हर शिकायती प्रार्थना पत्र की रिसिविंग देनी होगी। साथ ही उस पर कार्यवाही की सूचना भी शिकायतकर्ता को देनी होगी। उसमें लापरवाही करने पर सम्बन्धित हैल्प डेस्क कर्मचारी, जांचकर्ता अधिकारी या थानाध्यक्ष के विरूद्ध जनपदीय प्रभारी द्वारा कानूनी कार्यवाही की जायेगी। यह जानकारी पुलिस मुख्यालय द्वारा सूचना अधिकार केे अन्तर्गत नदीम उद्दीन एडवोकेट को सम्बन्धित परिपत्र की प्रति उपलब्ध कराने से सामने आयी है।

काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन (एडवोकेट) ने पुलिस मुख्यालय के लोक सूचनाधिकारी से थानो मे शिकायती पत्रों की प्राप्ति देने व कार्यवाही सम्बन्धी व्यवस्था के लिये दिये गये निर्देशों के सम्बन्ध में सूचना मांगी गयी थी। इसके उत्तर में पुलिस मुख्यालय की लोक सूचना अधिकारी/अपर पुलिस अधीक्षक (कार्मिक) शाहजहां जावेद खान ने 26 मार्च 2021 के पत्र के साथ पुलिस महानिदेशक के परिपत्र डीजी परिपत्र सं0 01/2021 दिनांक 20-02-2021 की फोटो प्रति उपलब्ध करायी है।

उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार द्वारा परिपत्र सं01 से निर्देश दिये गये है कि प्रार्थना पत्र रिसीविंग की पद्धति को औैर सृदृढ़ बनाये जाने हेतु प्रत्येक थाने पर गठित महिला डैस्क हैल्प को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाए कि कोई भी पीड़ित अथवा शिकायकर्ता थाने के बिना अपने प्रार्थना पत्र की रिसीविंग लिये न जाए। थाने में स्थापित महिला हैल्प डैस्क रिसेप्शन सेन्टर के रूप में काम करेगा। जिसमें रिसेप्शन रूम के अनुसार शिकायतकर्ता/पीड़ित के लिए उचित सुविधाएं जैसे आगन्तुक के बैठने के लिये सहज व सुगमता पूर्ण व्यवस्था आदि हो।

महिला हैल्प डैस्क में नियुक्त कर्मचारी करूण व सरल स्वभाव वाले हो तथा पीड़ित/दिव्यांगजन के प्रति संवेदनशील पूर्वक व्यवहार करें। पीड़ित चूंकि पूर्व से ही पीड़ित होता है इसलिये उसे सौहार्द पूर्ण वातावरण मिले इस बात का विशेष ध्यान रखा जाये यदि कोई पीड़ित/शिकायकर्ता प्रार्थना पत्र नहीं लाया हैै तो उसकी मौखिक रिपोर्ट को जी0डी0 में दर्ज करते हुए उस पर वैधानिक कार्यवाही की जाए। इसी प्रकार सोशल मीडिया सेे प्राप्त होने वाली शिकायतेें जैैसे व्हाट्सएप्प, ईमेल, फोन आदि पर भी संज्ञान ले औैर बाद समाप्ति कार्यवाही आवेदक को भी सूचित करें। यह सम्पूर्ण जिम्मेदारी महिला हैल्प डैस्क को दी जाए।

डीजी के परिपत्र में इस व्यवस्था की माॅनिटरिंग की भी व्यवस्था की गयी है। इसके अनुसार शिकायती प्रार्थना पत्र पर जांच/कार्यवाही के पश्चात आवेदक को सूचित कर दिया गया है, यह हैल्प डैस्क के कर्मचारियों को सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। ये कर्मचारी प्रतिदिन प्राप्त होने वाले शिकायती प्रार्थना पत्र/सूचनाओं को एक रजिस्टर में अंकन करेगा जिसको प्रतिदिन थाना प्रभारी द्वारा, 15 दिन में क्षेत्राधिकारी द्वारा, 30 दिन में पुलिस अधीक्षक द्वारा व प्रत्येक तिमाही /आकास्मिक रूप से जनपदीय प्रभारी द्वारा चैक किया जायेगा। मुख्यालय स्तर से भी आकास्मिक स्तर पर चैकिंग की जा सकती है।

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