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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन पौड़ी की विकासखण्ड वार कार्य प्रगति की समीक्षा बैठक

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स्थानीय संवाददाता / पौंडी गढ़वाल। विकास भवन सभागार पौड़ी में आज मुख्य विकास अधिकारी आशीष भटगाई की अध्यक्षता में उत्तराखण्ड राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन पौड़ी की विकासखण्ड वार कार्य प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित की गयी। मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित एक गरीबी उन्मूलन परियोजना है, जो स्वरोजगार और ग्रामीण गरीबों के संगठन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गरीबों को एसएचजी समूहों में संगठित किया जाना और उन्हें स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना है। उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य गठित समूहों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर स्वरोजगार से जोड़ना है। कहा कि गठित कई समूह अच्छा कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कम कार्य प्रगति करने पर नाराजगी जाहिर करते हुए सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष पूर्ण करना सुनिश्चित करें। साथ ही उन्होंने बैठक में अनुपस्थित रहने पर पोखड़ा विकासखण्ड के एबीडीओ का एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश पीडी डीआरडीए को दिए।

उत्तराखण्ड राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की योजनाओं को लेकर आयोजित बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि एन.आर.एल.एम. के तहत स्वयं सहायता समूह अच्छा कार्य कर रहे हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि विभिन्न योजनाओं के तहत जो भी कार्य किए जा रहे हैं, उनमें प्रशिक्षण दिलाया जाए। कहा कि मनरेगा के तहत हो रहे कार्यों में भी स्वयं सहायता समूह को मदद दी जाए और मिलकर कार्य किया जाय। उन्होंने कहा कि एन.आर.एल.एम के अंतर्गत समूह का गठन किया जाता था।

समूहों को आर.ए.एफ. व क्षेत्रीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए सामुदायिक निवेश निधि देनी होती है। साथ ही ग्रामीण समूह व क्लस्टर लेबल फेडरेशन बनाना होता है। कहा कि वर्षवार लक्ष्यों को पूरा करने हेतु ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया। साथ ही स्वयं सहायता समूहों कैसे आजीविका से जुड़कर अपनी आर्थिकी मजबूत कर सकेंगे। उन्होंने बैंक अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों के बैंक खातों में आ रही समस्यों का निस्तारण करना सुनिश्चित करें। उन्होंने सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष स्वयं सहायता समूह बनाये और उसमें एस.ई.सी.सी परिवारों को प्राथमिकता में रखें।

रिपोर्ट -वीरेंद्र रावत

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