बीएसएनके न्यूज / देहरादून डेस्क। उत्तराखण्ड सरकार ने राज्य में समान और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था लागू करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में आयोजित एक गरिमामयी कार्यक्रम में ‘उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ का विधिवत शुभारंभ किया। इस ऐतिहासिक निर्णय के साथ ही राज्य में पूर्व से चले आ रहे मदरसा बोर्ड को समाप्त कर नई व्यवस्था को लागू कर दिया गया है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र वितरित किए और विद्यार्थियों को एन.सी.ई.आर.टी. (NCERT) की पुस्तकें भी भेंट कीं।
प्रत्येक बच्चे को मिलेगा समान अवसर: मुख्यमंत्री धामी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह केवल एक संस्था की शुरुआत नहीं है, बल्कि राज्य के प्रत्येक बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने वाला ऐतिहासिक निर्णय है।
“उत्तराखण्ड देवभूमि होने के साथ-साथ ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्म की समृद्ध परंपरा वाली भूमि रही है। हमारी सरकार का लक्ष्य है कि समाज के सभी वर्गों को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और संस्कारयुक्त शिक्षा उपलब्ध हो। 1 जुलाई 2026 से स्थापित यह प्राधिकरण देश के लिए शिक्षा के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित होगा।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मदरसा बोर्ड को समाप्त कर इस प्राधिकरण की स्थापना किसी समुदाय की पहचान या परंपराओं को प्रभावित करने के लिए नहीं, बल्कि सभी वर्गों को बेहतर और समान शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए की गई है। नई व्यवस्था के तहत उन सभी अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों को बराबरी का अवसर मिलेगा, जिन्हें पहले की व्यवस्थाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया था।
आधुनिक तकनीक और ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020’ पर जोर
बदलते दौर का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय ज्ञान, नवाचार और तकनीक का युग है। एआई (AI), मशीन लर्निंग, डिजिटल तकनीक और नए कौशल भविष्य की दिशा तय कर रहे हैं। ऐसे में उत्तराखण्ड का कोई भी बच्चा विकास की इस दौड़ में पीछे न छूटे, इसके लिए सरकार डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट कक्षाओं, स्टार्टअप और आधुनिक प्रशिक्षण को बढ़ावा दे रही है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नीति केवल डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि कौशल, अनुसंधान और रोजगार से जोड़ने पर बल देती है। यह नया प्राधिकरण केवल मान्यता देने वाली संस्था नहीं होगा, बल्कि शिक्षक प्रशिक्षण, पारदर्शी व्यवस्था और एनईपी (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन का मजबूत माध्यम बनेगा।
‘विविधता में एकता’ हमारी ताकत
मुख्यमंत्री ने मान्यता प्राप्त करने वाले संस्थानों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी जिम्मेदारी अब और बढ़ गई है। उन्हें ऐसे नागरिक तैयार करने हैं जो ज्ञानवान, संस्कारित और राष्ट्र के प्रति समर्पित हों। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी ‘विविधता में एकता’ है और राज्य सरकार इसी भावना के साथ सबका साथ, सबका विकास के सिद्धांत पर कार्य कर रही है। उन्होंने सभी धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों से इस नई पहल को सफल बनाने में सहयोग की अपील की।
कार्यक्रम में गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
इस ऐतिहासिक अवसर पर सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे, जिनमें गणेश जोशी (कैबिनेट मंत्री), प्रदीप बत्रा (विधायक), उमेश शर्मा काउ (विधायक),डॉ. पराग मधुकर धकाते (विशेष सचिव),डॉ. सुरजीत सिंह (अध्यक्ष, उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण). इसके साथ ही विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के धर्मगुरु, शिक्षाविद एवं शिक्षण संस्थाओं के प्रबंधक और प्रबुद्ध नागरिक भी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।


