नंदा देवी राजजात के आयोजन पर असमंजस, 2026-27 को लेकर मंथन तेज

नंदा देवी राजजात के आयोजन पर असमंजस, 2026-27 को लेकर मंथन तेज
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बीएसएनके न्यूज / चमोली डेस्क । श्रीनंदा देवी राजजात के कुलसारी स्थित यात्रा पडा़व पर सोमवार को हुई बैठक में राजजात समन्वय समिति के गठन के साथ ही 2026 में होने वाली लोकजात यात्रा को भव्य रूप में आयोजित किए जाने तथा 2027 में आयोजित की जा रही नंदा राजजात को लेकर चर्चा की गई। कुलसारी राजजात पड़ाव के अध्यक्ष गोविंद सिंह भण्डारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में बधाण पट्टी के 14 सयाने,सिद्धपीठ कुरूड़ और  देवराड़ा के पुजारी गौड़ ब्राह्मण, राजजात और बड़ी जात समिति के पदाधिकारी तथा यात्रा पडा़व समितियों के पदाधिकारी मौजूद थे।

बैठक में राजजात यात्रा के आयोजन को लेकर विस्तृत चर्चा तो हुई लेकिन एकमत की सहमति नहीं बन पाई। कुछ लोगों का कहना था कि परंपरा के अनुसार श्रीनंदा देवी की राजजात अपने निर्धारित समय 2026 में ही आयोजित होनी चाहिए। वहीं दूसरे पक्ष का कहना था कि 2025 में आई आपदा के कारण क्षतिग्रस्त हुए यात्रा मार्गों का सुधारीकरण नहीं हो पाया है।

विशेषकर निर्जन हिमालयी क्षेत्र में यात्रा मार्ग की स्थिति बेहद खराब है। ऐसे में राजजात यात्रा का आयोजन जोखिमभरा हो सकता है। इसलिए इसपर गंभीरता से सोचा जाना चाहिए। अधिकतर लोगों का कहना था कि यात्रा पडा़वों के अवस्थापना विकास के बगैर राजजात का आयोजन 2026 में होना मुश्किल है।इसलिए राजजात 2027 में ही होनी चाहिए।

इस अवसर पर गठित की गई राजजात समन्वय समिति के अध्यक्ष पद पर थराली के पूर्व प्रमुख सुशील रावत, महासचिव चरणसिंह, कृष्णा सिंह, कर्णप्रयाग, थराली, देवाल तथा नंदानगर(घाट)के ब्लॉक प्रमुखों को समिति के संरक्षक के रूप में चुना गया। मंशाराम गौड़, हीरा सिंह बुग्याली, हीरा सिंह पहाड़ी, कुंवर सिंह, हीरा सिंह दानू,देवेंद्र पंचोली को बतौर सदस्य चुना गया।

रिपोर्ट – सुरेन्द्र धनेत्रा,स्थानीय संपादक

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