बीएसएनके न्यूज / देहरादून डेस्क । जेनेराली सेंट्रल इंश्योरेंस (जो दुनिया की बड़ी बीमा कंपनी जेनेराली और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का संयुक्त उपक्रम है) ने आज अपने नए और साहसी अभियान ‘हैप्पी विमेंस पे’ के लॉन्च की घोषणा की। इस पहल के मुताबिक अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की भावना का वास्तविक सम्मान का तरीका है महिला व पुरुष कर्मचारियों के लिए एक समान वेतन। यह पहल पारंपरिक अभिवादन को नए तरीके से पेश करती है, और वेतन में समानता को कॉर्पोरेट जवाबदेही के केंद्र में रखती है।
स्त्री-पुरुष बराबरी पर बातें तो ज़ोरदार होती हैं लेकिन इनके बावजूद वैश्विक आंकड़ें दर्शाते हैं कि महिलाएं अभी भी पुरुषों के बराबर काम के लिए पुरुषों से कम कमाती हैं – और, यह अंतर कोरोना महामारी के बाद और भी ज्यादा बढ़ गया है। जेनेराली सेंट्रल इंश्योरेंस औपचारिक इशारों से नहीं बल्कि कार्यवाही से जवाब देती है, एक समान वेतन के अपने वादे को दोहराती है और इस बात पर ज़ोर देती है कि असली उत्सव ढांचागत निष्पक्षता में है, प्रतीकवाद में नहीं।
यह अभियान एक कठोर सच्चाई का सामना करता हैः भारत में जेंडर पे गैप लगभग 35 प्रतिशत है, जिसमें महिलाएं पुरुषों के वेतन का केवल 65 प्रतिशत ही कमाती हैं, जबकि समान पारिश्रमिक अधिनियम को दशकों हो गए हैं।
इस पहल के बारे में जेनेराली सेंट्रल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ अनुप राउ ने कहा, ’’सस्टेनेबल बिज़नेस हर स्टेकहोल्डर – कर्मचारी, ग्राहक, साझेदार और शेयरधारक – के लिए निष्पक्षता और भरोसे पर निर्मित होते हैं। एक समान काम के लिए एक समान वेतन कोई आकांक्षा नहीं होनी चाहिए; यह सामान्य नियम होना चाहिए। जब संगठन इसे सही तरीके से करते हैं, तो वे सिर्फ समानता के मुद्दे को ही हल नहीं करते, बल्कि वे कार्यस्थल के भीतर और बाहर भी मज़बूत टीम और ज्यादा भरोसा निर्मित करते हैं।
जेनेराली सेंट्रल इंश्योरेंस में, हम वेतन समानता को इस बात का बेसिक टैस्ट मानते हैं कि हम अपने मूल्यों पर चल रहे हैं या नहीं। हैप्पी विमेंस पे जैसी पहलें ज़रूरी हैं क्योंकि वे कंपनियों को ईमानदारी से आंकड़े देखने और खुद से पूछने के लिए प्रेरित करती हैं कि क्या वे सही कर रही हैं, पर्याप्त कर रही हैं।”
जेनेराली सेंट्रल इंश्योरेंस ने महिला दिवस को एक शब्द से बदल दिया हैः हैप्पी विमेंस डे की जगह हैप्पी विमेंस पे कर दिया है। कंपनी ने जो विज्ञान फिल्म बनाई है उसमें स्लैम-पोएट्री है जिसे 15 महिलाओं ने आवाज़ दी है, जो कार्यस्थल पर निष्पक्षता और सम्मान की मांग करती हैं।
यह कैम्पेन फूलों और बधाई के मुकाबले बराबर सैलरी की मांग को दर्शाती है – यह एक दिन का ऐलान नहीं, बल्कि पूरे साल का वादा है। डिजिटल, सोशल, प्रिंट और इंटरनल चैनलों पर इसे बढ़ावा देकर, यह वेतन पारदर्शिता और बराबरी पर बातचीत को बढ़ावा देती है। हैप्पी विमेंस पे के माध्यम से जीसीआई कॉर्पोरेट इंडिया से जश्न से आगे बढ़कर व्यवस्था में परिवर्तन लाने की अपील करती है।
इस कैम्पेन को डिजिटल प्लैटफॉर्म और आउट-ऑफ-होम मीडियम के ज़रिए रणनीतिक के तहत प्रमोट किया जाएगा, जिससे एक व्यापक और असरदार मौजूदगी सुनिश्चित होगी जो ऑनलाइन और फिजिकल जगहों पर ऑडियंस को जोड़ेगी।



