बीएसएनके न्यूज / चमोली डेस्क। दुनिया की सबसे बड़ी टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में से एक, इंडस टावर्स लिमिटेड ने सस्टेनेबल ग्रीन इनिशिएटिव फाउंडेशन (एसजीआईएफ) के सहयोग से, 1620 छोटे एवं सीमांत किसानों के खेतों में 65,000 फल वाले पेड़ लगाने में मदद कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इस कार्यक्रम में दौलत सिंह बिष्ट, अध्यक्ष जिला पंचायत चमोली;भूपाल राम टम्टा, विधायक थराली विधानसभा; लखपत सिंह बुटोला, विधायक बद्रीनाथ विधानसभा; जे.पी. तिवारी, जिला कृषि अधिकारी; और नितेंद्र सिंह, जिला बागवानी अधिकारी मौजूद रहे।
यह पहल इंडस टावर्स के प्रमुख सीएसआर प्रोग्राम ‘प्रगति’ का एक भाग है तथा भारत सरकार के नेशनल एक्शन प्लान ऑन क्लाइमेट चेंज और ग्रीन इंडिया मिशन के अनुरूप है। बड़े पैमाने का यह वृक्षारोपण अभियान न सिर्फ हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण की मुश्किलों को हल करता है बल्कि ग्रामीण परिवारों को स्थायी आजीविका भी उपलब्ध कराता है।
इस पहल पर पर बात करते हुए तेजिन्दर कालरा, सीओओ, इंडस टावर्स लिमिटेड ने कहा, ‘‘इंडस टावर्स में हमारा मानना है कि पर्यावरण की सुरक्षा और ग्रामीण प्रगति दोनों एक साथ जारी रहने चाहिए। चमोली में यह वृक्षारोपण अभियान इस बात का शक्तिशाली उदाहरण है कि वैज्ञानिक तरीकों, समुदाय की भागीदारी और निरंतर सहयोग के द्वारा पर्यावरणी संतुलन को बहाल किया जा सकता है, साथ ही छोटे एवं सीमांत किसानों को आजीविका के बेहतर अवसर भी उपलब्ध कराए जा सकते हैं। हम समुदाय के सहयोग से जलवायु पर सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करते हुए जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार लाना चाहते हैं। यह प्रोग्राम उत्तराखण्ड के चमोली ज़िले स्थित नंदनगर ब्लॉक के सुदूर हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण एवं आजीविका की दृष्टि से एक बड़ा हस्तक्षेप साबित हुआ है।
इस पहल के तहत पेड़ लगाने के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाए गए, खेत पर सख्त निगरानी रखी गई और साथ ही समुदाय की भागीदारी को भी सुनिश्चित किया गया। किसानों को बागवानी एवं पर्यावरण संरक्षण के तरीकों पर जानकारी दी गई। कुल मिलाकर इस प्रोग्राम का उद्देश्य जलवायु संरक्षण को बढ़ाना, मृदा अपरदन को कम करना तथा आय- उत्पन्न करने वाले स्थायी बागानों का निर्माण कराना था। एक विशेष पहल ‘हर घर 5 पेड़’ ने महिला स्वयं सहायता समूहों को उनके घर के सामने पांच फल वाले पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि उनके बच्चों एवं परिवार को पोषक आहार मिल सके, साथ ही वे अपने घर में रहते हुए पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदारी की भावना को बढ़ावा दे सकें।
इन प्रयासों की सराहना करते हुए मोहन सिंह नेगी, सामाजिक कार्यकर्ता, रमानी ने कहा, ‘‘इंडस टावर्स के वृक्षारोपण एवं आजीविका प्रोग्राम के तहत चमोली में किया गया वृक्षारोपण इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि किस तरह कॉर्पोरेट एक्शन- पर्यावरण एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को सशक्त बना सकता है। हिमालयी क्षेत्र में इस पैमाने के प्रयास बदलावकारी हैं। वैज्ञानिक वृक्षारोपण को बढ़ावा देकर, किसानों का प्रशिक्षण प्रदान कर, महिलाओं को सशक्त बनाकर और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के द्वारा इंडस टावर्स ने उत्तराखण्ड की दीर्घकालिक पारिस्थितिक सुरक्षा तथा छोटे एवं सीमांत किसानों की समृद्धि के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाया है।
मैं हमारे विभागों के साथ उनकी साझेदारी और जीवन में सुधार लाने के लिए उनके समर्पण हेतु उनकी सराहना करता हूं। वृक्षों को जंगली एवं आवारा जानवरों से सुरक्षित रखने के लिए- जो इस क्षेत्र की बड़ी चुनौती है- इस प्रोग्राम में सोलर इलेक्ट्रिक एवं नॉयलॉन फेंंसिंग लगाने में भी सहयोग दिया गया। कई गांवों के किसानों ने ज़मीन, मज़दूरी और पैसे का योगदान देकर बड़े-बड़े फलों के बाग बनाए, जिनकी सुरक्षा सामूहिक व्यवस्था से की गई। इस तरह सुनिश्चित हुआ कि पेड़ लम्बे समय तक जीवित रहें और ज़्यादा फल दें।
इस प्रोजेक्ट के तहत कृषि विभाग के सहयोग से मिट्टी की जांच की गई और किसानों के लिए प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए। इन सत्रों के दौरान उन्हें पैदावार बढ़ाने, मिट्टी की सेहत बेहतर बनाने और बागवानी के आधुनिक तरीकों के बारे में ज़रूरी जानकारी दी गई। इसके अलावा, ब्लॉक के स्कूली बच्चों को कम उम्र में ही जागरूकता सत्रों के ज़रिए पर्यावरण के बारे में शिक्षित किया गया।
प्रोग्राम के बदलावकारी प्रभाव पर ज़ोर देते हुए दुर्गेश रतुरी, डायरेक्टर, सस्टेनेबल ग्रीन इनीशिएटिव फाउन्डेशन ने कहा, ‘‘यह पहल दर्शाती है कि कैसे सुनियोजित वृक्षारोपण अभियान ग्रामीण आजीविका एवं पर्यावरण संरक्षण को नया आयाम दे सकता है और किसानों को पर्यावरण के संरक्षक के रूप में सशक्त बना सकता है।
प्रशिक्षण, सरकारी सहयोग एवं स्थनीय इनोवेशन्स जैसे कलेक्टिव फेंसिंग, घरेलू स्तर पर वृक्षारोण आदि के द्वारा इस प्रोजेक्ट ने स्थायी विकास की मजबूत नींव तैयार की है। इंडस टावर्स के साथ हमारी साझेदारी ने दर्शाया है कि जब समुदाय ज़िम्मेदारी से काम करते हैं तो पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए दीर्घकालिक लाभ को सुनिश्चित किया जा सकता है।’


