बीएसएनके न्यूज / नारायणबगड़,चमोली डेस्क । उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में 5th शेड्यूल और ट्राईबल स्टेस लागू करवाने हेतु उत्तराखंड एकता मंच द्वारा नारायणबगड़ में एक गोष्टी का आयोजन किया गया जिसमें वक्ताओं द्वारा पांचवीं अनुसूची के बारे मे जानकारी देते हुए स्थानीय हक-हकुकों के इनके लागू होने पर मजबूती मिलने की बात कही।
स्थनीय अंजली लॉज में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड एकता मंच के अध्यक्ष अनूप बिष्ट ने कहा कि देश के अन्य 12 हिमालयी राज्यों के मूल निवासियों को ट्राइब स्टेटस मिला हुआ है,लेकिन उत्तराखंड के पर्वतीय समुदाय को इससे वंचित रखकर उनके साथ ऐतिहासिक अन्याय किया गया है।
इस मौके पर महेंद्र रावत ने बताया कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में साल 1972 तक ट्राइबल कानून लागू थे। इसके तहत पहाड़ी समुदाय का अपने जल, जंगल और जमीन पर पूरा अधिकार था, जिसे बाद में सरकार ने हटा लिया।
वहीं दिल्ली हाईकोर्ट की अधिवक्ता आभा थपलियाल ने बताया कि जनजातीय दर्जा मिलने से पहाड़ के युवाओं को शिक्षा,रोजगार और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही:जल,जंगल और जमीन पर स्थानीय समाज का मालिकाना हक वापस मिलेगा।पेसा एक्ट (PESA Act) लागू होने से ग्राम सभाएं बेहद शक्तिशाली होंगी।मूल निवास 1950 और देश का सबसे मजबूत भू-कानून स्वतः लागू हो जाएगा।पहाड़ की अनूठी संस्कृति और पहचान को संवैधानिक संरक्षण मिलेगा।
वहीं निशांत रौथाण ने दो टूक कहा कि इस बार पर्वतीय समुदाय उसी राजनीतिक दल या प्रत्याशी को वोट देगा,जो अपने चुनावी घोषणा पत्र में ‘5वीं अनुसूची’ और ‘ट्राइब स्टेटस’ के मुद्दे को शामिल करेगा। मंच ने ऐलान किया कि इस मांग को एक जन-आंदोलन बनाया जाएगा और ट्राइब स्टेटस के मुद्दे को पहाड़ के हर घर तक पहुंचाया जाएगा।
इस अवसर पर पूर्व कनिष्ठ उप प्रमुख दलबीर सिंह रावत,सामाजिक कार्यकर्ता दलीप सिंह नेगी,संजय सिंह नेगी,संदीप कुमार पटवाल,पूर्व प्रधान रमेश गुसाईं, पूर्व प्रधान मृतुन्जय परिहार,संदीप सिंह,यशवंत सिंह,विक्रम सिंह माहोड़ी, परवेश जोशी,अनिल उप्रेती, बिट्टू नेगी,आदि मौजूद रहे।
रिपोर्ट – सुरेन्द्र धनेत्रा,स्थानीय सम्पादक


