उत्तराखंड की आबकारी नीति भारतीय शराब निर्माताओं के साथ भेदभाव करती है; विदेशी निर्माताओं को बढ़ावा देती है-सीआईएबीसी

उत्तराखंड की आबकारी नीति भारतीय शराब निर्माताओं के साथ भेदभाव करती है; विदेशी निर्माताओं को बढ़ावा देती है-सीआईएबीसी
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बीएसएनके न्यूज डेस्क । उत्तराखंड सरकार की “भेदभावपूर्ण” आबकारी नीति पर आपत्ति जताते हुए भारतीय शराब निर्माताओं ने कहा है कि राज्य के मॉल और डिपार्टमेंटल स्टोर्स के प्रीमियम स्टोर्स में केवल आयातित शराब की बिक्री की अनुमति देना प्रधानमंत्री की “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” पहल के खिलाफ है।

यह कहते हुए कि उत्तराखंड की आबकारी नीति स्पष्ट रूप से आयातित वाइन और स्पिरिट को बढ़ावा देती है, कांफ्रेंडरेशन ऑफ़ इंडियन अलकोलिक बेवरेज कम्पनीज ने कहा कि यह नीति राज्य के मॉल और डिपार्टमेंटल स्टोर्स के प्रीमियम दुकानों में विदेशी निर्मित मादक पेय पदार्थों के आयातकों को लगभग एकाधिकार प्रदान करती है, जबकि राज्य के उपभोक्ताओं को विश्वस्तरीय भारतीय मादक पेय पदार्थों तक पहुंच से वंचित करती है।

सीआईएबीसी का कहना है कि यह आबकारी नीति अन्य राज्यों में बनने वाली भारतीय वाइन और स्पिरिट पेय के उत्पादकों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। संगठन ने उत्तराखंड सरकार को कई पत्र लिखे हैं और ज्ञापन दिए हैं, जिनमें आग्रह किया गया है कि उत्तराखंड में बने हों या अन्य राज्यों में, सभी भारतीय निर्मित मादक पेय पदार्थों आईएमएफएल और वाइन को मॉल और डिपार्टमेंटल स्टोर्स के सभी प्रीमियम स्टोर्स में बिक्री की अनुमति दी जाए।

सेना और अर्धसैनिक बलों ने भारतीय निर्मित स्पिरिट को बढ़ावा देने के लिए लंबे समय पहले कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट में आयातित शराब की बिक्री बंद कर दी है। ऐसे में ऐसी नीति लागू करना जो भारतीय उत्पादों की कीमत पर आयातित उत्पादों को खुलकर बढ़ावा दे, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय एजेंडे के विपरीत है।

सीआईएबीसी के महानिदेशक अनंत एस. अय्यर ने कहा, “भारत में बनने वाले कई ब्रांड दुनिया भर में लोकप्रिय हैं, लेकिन विभिन्न बाधाओं के कारण सभी ब्रांड उत्तराखंड में निर्मित नहीं हो सकते। उदाहरण के लिए, वाइन बनाने के लिए आवश्यक अंगूर राज्य में उपलब्ध नहीं हैं और वे केवल महाराष्ट्र और कर्नाटक में उगाए जाते हैं। इसी तरह कई अन्य लॉजिस्टिक बाधाओं के कारण सभी आईएमएफएल ब्रांड उत्तराखंड में नहीं बन सकते। सिर्फ इसलिए कि वे उत्तराखंड में निर्मित नहीं होते, मॉल और डिपार्टमेंटल स्टोर्स में लोकप्रिय और वैश्विक पुरस्कार जीतने वाली भारतीय वाइन और स्पिरिट पेय पदार्थों को बिक्री की अनुमति न देना बेहद अनुचित है।

अय्यर ने आगे कहा, “राज्य के स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को भारतीय उत्पादों से क्यों वंचित किया जाए? यह स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने की भावना के खिलाफ है। इसलिए भारतीय मादक पेय उद्योग उत्तराखंड सरकार से भारतीय निर्मित उत्पादों आईएमएफएल और वाइन को समर्थन देने की अपील करता है।”

उन्होंने यह भी कहा, “उत्तराखंड सरकार को संकीर्ण दृष्टिकोण से हटकर सक्रिय कदम उठाने चाहिए ताकि भारतीय उत्पाद विश्व स्तर पर अग्रणी बन सकें। आबकारी नीति में इस तरह के प्रतिबंध स्पष्ट रूप से ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना और उद्देश्य के खिलाफ हैं, जिसकी घोषणा और प्रोत्साहन हमारे सम्मानित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय उद्योग के लिए किया है।

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Author: BSNK NEWS

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