बीएसएनके न्यूज / देहरादून डेस्क । नई दिल्ली का विश्व पुस्तक मेला 2026 एशिया का सबसे बड़ा पुस्तक महोत्सव है। स्थानीय युवाओं के लिए यह अपने पसंदीदा लेखकों की किताबें खरीदने, दोस्तों के साथ समय बिताने, नाश्ते और एक कप कॉफी के साथ हरी घास पर बैठकर सर्दियों की ठंड को मात देने और तनाव मुक्त सैर का आनंद लेने के मुख्य स्थान के रूप में उभरा है। भारतीय सेना पर आधारित इस मेले का उद्देश्य सशस्त्र बलों को श्रद्धांजलि देना है। “भारतीय सैन्य इतिहासः वीरता और ज्ञान @75” पुस्तक मेले का शीर्षक है।
जनवरी की ठंड आम तौर पर दिल्ली के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ाई को भी धीमा कर देती है और छात्रों को थोड़ी राहत मिल जाती है। पुस्तक मेले में इन छात्रों को भारतीय औऱ वैश्विक साहित्य का सशक्त खरीदार माना जाता है और फ्री एंट्री ने तो स्थिति को और भी बेहतर बना दिया है। जैसा कि रामजस कॉलेज में हिंदी साहित्य के छात्र रचित ने कहा, “हम एक अनौपचारिक यात्रा की योजना बना रहे थे, लेकिन चूंकि हम सभी छात्र हैं, इसलिए हमने यहां आने का फैसला किया। मुझे साहित्य में गहरी रुचि है और मुझे उर्दू कविता पसंद है। इसलिए यह जगह मुझे दोस्तों के साथ समय बिताने और अपने शौक को आगे बढ़ाने के लिए आदर्श लगी। मुफ्त प्रवेश ने हमारे लिए गंतव्य चुनना आसान बना दिया, क्योंकि यहां कोई लंबी कतार नहीं है।
पुस्तक मेले में विभिन्न समूहों के अलावा लड़कियों और लड़कों के समूहों को मन-पसंद भोजन का आनंद लेते देखा जा सकता है। स्वदेशीपन का एहसास पाने के लिए कुछ लोग वैश्विक ब्रांडों के बजाय स्थानीय चीज़ों को ज़्यादा पसंद कर रहे हैं। अपने चार दोस्तों के साथ मेले में आई तनिष्का ने अपने ऑर्डर का इंतजार कर रहते हुए कहा, “आम तौर पर, वड़ापाव मुंबईवासियों के लिए सबसे अधिक मांग वाला भोजन है, लेकिन यहां दिल्ली में इसे अनूठा माना जाता है और हम सभी ने इसे ही ऑर्डर किया है।” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “सर्दियों में भी ठंडे पेय के साथ इसका स्वाद बेहतर होता है।
यह मेला भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है और 18 जनवरी को इसका समापन होगा। 35 से अधिक देशों के एक हजार से अधिक प्रकाशक भी इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं। यहां लेखकों, विद्वानों, कलाकारों और सार्वजनिक हस्तियों सहित लगभग 1,000 से अधिक वक्ताओं ने अपने विचार और अनुभव साझा किए। पुस्तक मेला प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात आठ बजे तक जनता के लिए खुला रहता है, जहां 600 से अधिक साहित्यिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है।
मेले के एक आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, “युवा आगंतुकों की संख्या उत्तरोत्तर बढ़ रही है, जो उत्साहजनक है। यहां युवा आते हैं और साहित्यिक एवं विषय-उन्मुख कार्यक्रमों सहित विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेकर अपना दिन बिताते हैं। यहां पुस्तकों की बिक्री भी बढ़ी है, जो इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के साथ बड़े हुए युवाओं के बीच पढ़ने की प्रवृत्ति का संकेत देती है। हम सप्ताहांत पर भारी भीड़ की मेजबानी करने के लिए तैयार हैं क्योंकि मेला रविवार को ही समाप्त हो रहा है।



