बीएसएनके न्यूज / चंपावत डेस्क। इरोस वेलनेस ने चंपावत जिले के टनकपुर अस्पताल और बनबसा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अपने एआई आधारित निवारक स्वास्थ्य कार्यक्रम की शुरुआत की है। इसके साथ ही कंपनी गुजरात और आंध्र प्रदेश के बाद अब उत्तराखंड में भी पहुंच गई है। उत्तराखंड कंपनी का तीसरा राज्य है, जहां इस कार्यक्रम को लागू किया गया है। यह कंपनी की किसी हिमालयी और अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे जिले में पहली शुरुआत है।
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखंड और मुख्य चिकित्सा अधिकारी, चंपावत के कार्यालय के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों की शुरुआती स्वास्थ्य जांच करना और अलग-अलग स्वास्थ्य मापदंडों की जानकारी जुटाना है। यह कार्यक्रम ऐसे इलाकों में शुरू किया गया है, जहां भौगोलिक परिस्थितियों और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच से जुड़ी कई चुनौतियां हैं।
इस कार्यक्रम में एआई आधारित चेहरे की जांच तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जो एक मिनट से भी कम समय में स्वास्थ्य और शरीर से जुड़े 28 संकेतकों की जानकारी देती है। इसके अलावा 32 अन्य स्वास्थ्य जांच भी की जाती हैं, जिनमें रक्तचाप, रक्त शर्करा, हीमोग्लोबिन, शरीर की संरचना, फेफड़ों की जांच, ईसीजी, शरीर में ऑक्सीजन का स्तर और तापमान जैसी जांच शामिल हैं।
इन सभी जांचों से 60 से अधिक स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़े आंकड़े प्राप्त किए जा सकते हैं। यह तकनीक डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की मदद के लिए तैयार की गई है। किसी भी बीमारी की पहचान और इलाज से जुड़े अंतिम फैसले डॉक्टर ही करेंगे।
“उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां हमारी ताकत भी हैं और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए चुनौती भी। हमारे कई लोग ऐसे इलाकों में रहते हैं, जहां किसी विशेषज्ञ डॉक्टर तक पहुंचने में पूरा दिन लग सकता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का हमेशा प्रयास रहा है कि स्वास्थ्य सेवाएं लोगों के और करीब पहुंचें,” कहा डॉ. संदीप तेवारी, मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखंड ने।
डॉ. शिल्पा देसाई, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, इरोस वेलनेस अनुसंधान एवं विकास ने कहा, “उत्तराखंड हमारे लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यहां की भौगोलिक परिस्थितियां और लोगों की जीवनशैली गुजरात और आंध्र प्रदेश से अलग हैं। इससे हमें अलग-अलग परिस्थितियों में अपनी स्वास्थ्य तकनीक को समझने और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। हमारा सीधा तरीका है—एआई स्वास्थ्य जांच में मदद करता है, उपकरण स्वास्थ्य की जानकारी देते हैं और इलाज से जुड़े फैसले डॉक्टर करते हैं।


